Jaime Sabines translated by Geet Chaturvedi

ख़ाइमे साबिनेस (Jaime Sabines) की कविताएँ

ख़ाइमे साबिनेस (Jaime Sabines,1926-1999) मेक्सिको के कवि थे। नोबेल पुरस्‍कार विजेता कवि ओक्‍तावियो पास (Octavio Paz) उन्‍हें ‘स्‍पैनिश भाषा के सर्वश्रेष्‍ठ समकालीन कवियों में से एक’ मानते थे। स्‍पैनिश में उनकी कविता की दस किताबें प्रकाशित थीं। उन्‍होंने गद्य कविता में अधिक काम किया, लेकिन यह भी तथ्‍य है कि स्‍पैनिश में नेरूदा के बाद, साबिनेस की प्रेम कविताओं को सबसे अधिक मान मिला। यानी गद्य कविता के बावजूद उनमें प्रेम कविताओं जैसी कोमलता थी। कवि-अनुवादक डब्‍ल्‍यू. एस. मर्विन (W. S. Merwin), साबिनेस के बारे में कहते थे कि उन्‍हें पढ़ना जुनून की प्रामाणिकता को सुनने जैसा है।

उनकी मृत्‍यु के बाद न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने लिखा था, ‘कामनाओं पर लिखी साबिनेस की कविताओं को मेक्सिको की कई पीढ़ियों ने गले लगाया और बरसों तक उन्‍हें प्रेम के भजनों की तरह गाया। मेक्सिको में उनकी कविताओं को पढ़ा जाता है, उन्‍हें कंठस्‍थ किया जाता है, उनसे प्रेम किया जाता है।’

साबिनेस बेहद लोकप्रिय कवि थे, लेकिन उतने ही एकांतवासी भी। उनकी सार्वजनिक उपस्थितियाँ बेहद कम होती थीं। मृत्‍यु से कई बरस पहले उन्‍होंने आखि़री कविता-पाठ किया था, जिसमें उन्‍हें सुनने हज़ारों लोग आए थे। वह कविता पाठ मेक्सिको के नेशनल थिएटर में हुआ था, जिसकी बैठक-क्षमता सिर्फ़ एक हज़ार थी, लेकिन बाहर सड़कों पर दसियों हज़ार लोग आकर बैठ गए थे। उन श्रोताओं के लिए आयोजकों को दूर-दूर तक लाउडस्‍पीकर लगाने पड़े। यही नहीं, लोगों की उनकी कविताएँ शब्‍दश: याद थीं। वह कविता पढ़ते, लोग उनके साथ एक-एक शब्‍द बोलते जाते। कितना रोमांचक दृश्‍य रहा होगा- हज़ारों का समूह एक साथ, कवि की आवाज़ से आवाज़ मिलाकर, एक कविता पढ़ रहा है।

साबिनेस, मेक्सिको के साहित्यिक समूहों से भी दूर रहते थे, इसलिए उनकी कविता को शुरुआती समय में साहित्यिक समूहों ने नज़रअंदाज़ किया, लेकिन 1983 के बाद उनकी कविता लोकप्रिय होती गई। उसी बरस ओक्‍तावियो पास ने कहा, ‘मेरी नज़र में साबिनेस, लातिन अमेरिका के सबसे महत्‍वपूर्ण कवि हैं।’

पिता के दबाव में साबिनेस ने डॉक्‍टरी की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन तीन साल में ही छोड़ दी। एक इंटरव्‍यू में उन्‍होंने कहा था, ‘उसके पहले मेरी कविता साधारण-सी थी, दूसरों की नक़ल थी। लेकिन उन तीन बरसों में मैंने जाना कि मैं कविता के बिना जीवित नहीं रह सकता, और मैंने दवाएँ छोड़कर कविता पर ध्‍यान देना शुरू कर दिया।’

72 साल के जीवन के आखि़री दशक में सीढि़यों से गिर जाने के कारण उनके कूल्‍हे की हड्डी  टूट गई, जिसके इलाज में उन्‍हें तीस बार सर्जरी करानी पड़ी। इससे उनका शारीरिक और मा‍नसिक स्‍वास्‍थ्‍य प्रभावित हुआ और वह कविता नहीं कर पाए।

1999 में उनकी मृत्‍यु के बाद मेक्सिको के राष्‍ट्रपति ज़ेदियो ने प्रस्‍ताव दिया कि कवि की राजकीय अंत्‍येष्टि की जाए, लेकिन उनके परिवार ने इससे मना कर दिया। यह कहते हुए कि कवि ने पूरी ज़िंदगी सादगी में बिताई थी, इसलिए मौत की रस्‍में भी सादगी से ही होंगी।

*

चाँद

तुम हर दो घंटे में चाँद को चम्‍मच में भरकर
खा सकते हो या कैप्‍सूल में भरकर।
उससे नींद की गोली जैसा फ़ायदा मिलेगा और
दर्द-निवारक गोली की तरह भी।
और उन लोगों को इससे ख़ास फ़ायदा होगा
जो कुछ ज़्यादा ही फिलॉसफ़ी झाड़ा करते हैं।
अगर अपने बटुए में तुम चाँद का एक टुकड़ा रखोगे
तो वह भालू के बाल या ख़रगोश के पैरों से ज़्यादा चमत्‍कारी होगा।
उससे तुम्‍हें एक प्रेमी खोजने में मदद मिलेगी
या चोरी-छिपे धनवान बन जाने से।
उसके कारण डॉक्‍टर और अस्‍पताल भी तुमसे दूर ही रहेंगे।
जब बच्‍चे सोने से मना करें, तब
तुम उसे टॉफि़यों की तरह दे सकते हो उन्‍हें।
अगर बुज़ुर्गों की आंखों में दो बूंद चाँद डाला जाए
तो वे ज़्यादा आसानी से प्राण छोड़ पाते हैं।

चाँद का एक नया पत्‍ता
अपने तकिये के नीचे रखकर सोओ
और जो चाहे, सो सपना देखो।
चाँद की हवा से भरी हुई बोतल
हमेशा अपने पास रखकर चला करो
इससे तुम पानी में डूबने से बच जाओगे।
क़ैदियों और निराश लोगों को
चाभी की तरह दे दो चाँद।
जिन लोगों को सज़ा-ए-मौत मिली है
और जिन लोगों को सज़ा-ए-ज़िंदगी मिली है
ऐसे लोगों के लिए चाँद से बेहतर कोई टॉनिक नहीं है।
उसे थोड़ा-थोड़ा, लेकिन नियमित लिया करें।


मृत्यु के बारे में

उसे दफ़ना दो।
मिट्टी के नीचे सोये हैं कई ख़ामोश लोग
वे बाक़ायदा उसकी देखभाल करेंगे।
इसे यहाँ मत छोड़ो।
दफ़ना दो।

*

मिथ के बारे में

मेरी माँ ने बताया था कि मैं उसके गर्भ में ही रोया था।
लोगों ने उससे कहा था : तुम्‍हारा बेटा बहुत क़िस्मत वाला होगा।

मेरे जीवन के इन बरसों में
कोई तो है, जो मेरे कानों के पास धीरे-धीरे
बहुत धीरे-धीरे फुसफुसाते हुए कहती है :
जियो, जियो, जियो।

वह मृत्यु है।

*

उम्मीद के बारे में

ख़ुद को उम्मीद से भरा हुआ रखो।
जो दिन आने वाला है
वह तुम्‍हारी आंखों में किसी कली की तरह खिल रहा है
एक नई रोशनी की तरह।
बस इतना है :
जो दिन आने वाला है, वह कभी नहीं आने वाला।

*

अगर मैं अगले ही पल मरने वाला हूँ

अगर मैं अगले ही पल मरने वाला हूँ, तो मैं ज्ञान के ये कुछ शब्‍द लिखूंगा : रोटी का पेड़ और शहद, रूबाब का फल, कोका-कोला, ज़ोनाइट, स्वस्तिक। और उसके बाद मैं रोने लग जाऊंगा।

अगर तुम रोना चाहो, तो ‘माफ़ किया’ शब्द के बाद भी रो सकते हो।

और मेरे साथ ऐसा ही है। मैं अपने नाख़ून त्यागने को तैयार हूँ, ताकि मैं अपनी आंखें निकाल सकूं और कॉफ़ी के एक कप के ऊपर उसे नींबू की तरह निचोड़ सकूं।

(चलो, आँख के छिलके के साथ कॉफ़ी पियें, मेरी प्रिया। )

इससे पहले कि चुप्‍पी की बर्फ़ मेरी ज़ुबान पर जम जाए, इससे पहले कि मेरा गला दो हिस्‍सों में कट जाए और चमड़े के किसी झोले की तरह मेरा दिल उलटकर गिर जाए, मेरी जि़ंदगी, मैं तम्‍हें बताना चाहता हूँ कि कितना शुक्रगुज़ार हूँ मैं अपने इस बड़े कलेजे का, इसी के कारण मैं तुम्‍हारे बग़ीचे में घुसकर सारे गुलाब खा गया और किसी ने मुझे देखा तक नहीं।

मुझे याद है। मैंने अपने दिल को हीरों से भर लिया – हीरे, टूटकर गिरे हुए सितारे हैं जो धरती की धूल में धीरे-धीरे बूढ़े हो गए – जब भी मैं हँसता था, मेरे दिल के हीरों से खनखनाने की आवाज़ आती थी। सिर्फ़ एक ही बात से खीझता हूँ कि थोड़ा पहले पैदा हो सकता था मैं, पर नहीं हो पाया।

प्यार को मेरे हाथ में किसी मरी हुई चिड़िया की तरह मत रखो।

*

मैं ख़ुशियों को इस तरह महसूस करता हूँ

मैं ख़ुशियों को इस तरह महसूस करता हूँ, जैसे तैरते हुए किसी शहर की पीठ पर बारिश अपने पंख फड़फड़ाती है।

धूल नीचे बैठ जाती है। हवा शांत है, उसमें से गुज़रती हैं महक की पत्तियाँ, ठंडक के पक्षी और सपने। अभी-अभी जन्‍मे एक शहर की अगुवानी आसमान करता है।

ट्राम, बस, ट्रक, साइकिल पर और पैदल चलते लोग, हर रंग की गाड़ियां, ठेलेवाले, दुकानदार, भुने हुए केले, दो बच्‍चों के बीच उछलती हुई गेंदें : गली फैलती है, लोगों की आवाज़ें शाम की आखिरी रोशनी से टकरा दोगुनी हो जाती हैं, दिन अब सूख रहा है।

वे उस तरह बाहर निकलते हैं जैसे बरसात के बाद चींटियाँ, आसमान के छोटे-छोटे टुकड़ों को चुनने के लिए, अक्षुण्‍णता के नन्‍हें तिनके को अपने अंधेरे घरों की ओर ले जाते हुए, छतों से लटक रही हैं गूदेदार मछलियाँ, पलंग के नीचे जाला बुन रही हैं मकडि़याँ, घर के पिछवाड़े, कम से कम एक, परिचित भूत भी मौजूद है।

काले बादलों की माँ, तुम्‍हारा शुक्रिया, तुमने इस दुपहरी का चेहरा इतना सफ़ेद कर दिया है और हमारी मदद की है ताकि हम ज़िंदगी से प्‍यार करते रह सकें।  

*
 

कुछ समय बाद

कुछ समय बाद अनजान लोगों को तुम इस तरह सौंपोगे ये पन्‍ने जैसे तुम कटी हुई घास का गट्ठर किसी को देते हो।

अपनी उपलब्धियों पर गर्वित और दुखी तुम लौटोगे और अपने पसंदीदा कोने में ख़ुद को फेंक दोगे।

तुम ख़ुद को कवि कहते हो, क्योंकि तुममें इतनी विनम्रता नहीं है कि तुम चुप रह सको।

अरे ओ चोर, तुम्‍हें शुभकामनाएँ, ऐसा करके तुम अपनी पीड़़ा से कुछ चुरा ही रहे हो – और अपने प्रेम से भी। अपनी परछाईं के जो टुकड़े तुम चुन-चुनकर उठाते हो, देखते हैं, उनसे तुम कैसी तस्‍वीर बना पाते हो।

*

तुममें वह सब है, जो मैं खोजता हूँ

तुममें वह सब है, जो मैं खोजता हूँ, जिसकी प्रतीक्षा करता हूँ, जिससे मैं प्‍यार करता हूँ- तुममें वह है।
मेरे हृदय की मुट्ठी धड़क रही है, पुकार रही है।
तुम्‍हारे लिए कही कहानियों के प्रति मैं आभार प्रकट करता हूँ।
मैं तुम्‍हारे पिता और मां और मृत्‍यु को शुक्रिया कहता हूँ जिसने तुम्‍हें नहीं देखा।
तुम्‍हारे लिए चलती हवा का शुक्रिया।
तुम उतनी ही शानदार हो जितना गेहूँ,
अपनी देह के रेखाचित्र की तरह ही नाज़ुक हो तुम।
मैंने कभी किसी छरहरी औरत से प्‍यार नहीं किया
लेकिन तुमने मुझे प्‍यार में डाल ही दिया।
मेरी इच्‍छाओं को तुमने लंगर की तरह टिका दिया।
मेरी आँखों को दो म‍छलियों की तरह पकड़ लिया।
और इसी कारण मैं खड़ा हूँ तुम्‍हारे दरवाज़े पर, प्रतीक्षारत।

*

इस पर अच्‍छे से ग़ौर करना

वे कहते हैं कि वज़न घटाने के लिए मुझे कसरत करनी चाहिए
कि पचास की उम्र में चर्बी और सिगरेट ख़तरनाक होते हैं
कि अपनी देह को सुडौल बनाए रखना बहुत ज़रूरी है
और समय के ख़िलाफ़ एक जंग लड़ना, उम्र के ख़िलाफ़ भी।

अच्‍छी नीयत वाले विशेषज्ञ और दोस्‍ताना डॉक्‍टर
आहार की सूची और पूरी एक दिनचर्या बना कर देते हैं
ताकि ज़िंदगी को कुछ साल और लंबा किया जा सके।

इन अच्‍छी नीयतों के प्रति मैं कृतज्ञ हूँ, लेकिन मुझे हँसी आ जाती है
कि उनके सुझाव कितने खोखले हैं, कितना तुच्‍छ है उनका यह जोश

(मृत्‍यु को भी ऐसी चीज़ों पर हँसी आती है)

मैं सिर्फ़ एक ही सुझाव पर अमल करूंगा और वो यह कि
अपने बिस्‍तर में एक युवती को पा सकूं
क्‍योंकि इस उम्र में
यौवन ही वह एकमात्र चीज़ है जो ऐसे रोगों को ठीक कर सके।

*

पैदल

ऐसा कहा जाता है, ऐसी अफ़वाह है। दावतों में, कलादीर्घाओं में, कभी कोई एक या बहुत सारे लोग इस पर स्‍वीकृति की मुहर लगाते हैं, कि ख़ाइमे साबिनेस एक महान कवि है। या कम से कम एक अच्‍छा कवि है। या एक ठीक-ठाक सा कवि है। या बहुत सरल, कि वह एक कवि है।

ख़ाइमे ये सारी बातें सुनता है और ख़ुश होता है : अरे वाह! क्‍या बात है! मैं एक कवि हूँ। मैं एक महत्‍वपूर्ण कवि हूँ। मैं एक महान कवि हूँ। इन सारी बातों को मान वह घर से बाहर जाता है, या बाहर से घर लौटता है इन सारी बातों को मान। लेकिन तब कोई इस पर तवज्‍जो नहीं देता कि वह कवि है। जब वह गलियों में चलता है, तो कोई नहीं देता। और घर में एकाध ही लोग ही उसके कवि होने पर ध्यान देते हैं। कवियों के माथे पर कोई सितारा क्‍यों नहीं लगा होता? या उनकी चमक दिखने लायक़ क्‍यों नहीं होती? या उनके कानों से रोशनी की किरणें क्‍यों नहीं निकलतीं?

ख़ाइमे कहता है, हे ईश्‍वर! मुझे एक पिता भी होना पड़ता है, एक पति भी, दूसरों की तरह कारख़ाने में काम करना पड़ता है, दूसरों की तरह ही मैं घर से बाहर फिरता हूँ पैदल।

कहता है ख़ाइमे, हाँ, बिल्‍कुल यही है। इतना ही है। मैं कवि नहीं हूँ, मैं पैदल हूँ।

और इस बार वह अपने बिस्‍तर में जा घुसता है, ख़ुश और शांतचित्‍त।

*

टैगोर को पढ़ते हुए

टैगोर को पढ़ते हुए मैंने यह सोचा था : दिया, रास्‍ता, झरने के नीचे रखा घड़ा, नंगे पैर- ये सब एक खोई हुई दुनिया है। अब तो यहाँ बिजली के बल्‍ब हैं, बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ हैं, पानी के नलके हैं, जेट हवाई जहाज़ हैं। इनमें से कोई कहानियाँ नहीं सुनाता। टीवी और फिल्‍मों ने दादी-नानी की जगह ले ली है। और सारी तकनीक चमत्‍कार तक इस क़दर पहुंचती है कि बस, साबुन और टूथपेस्‍ट के बारे में बता पाती है।

मुझे नहीं पता कि मैं क्‍यों चलता हूँ, लेकिन इस समय मुझे टैगोर की कोमलता की तरफ़ आ जाना चाहिए, पूरब की पूरी कविता की तरफ़ जो कंधे पर मटका लेकर चल रही लड़की को हमारे दफ़्तर की लायक़ लेकिन ग़रीब टाइपिस्‍ट में बदल देती है। आख़िरकार, हमारे बादल एक ही हैं, हमारे सितारे एक ही और अगर ग़ौर से देखा जाए, तो हमारे समंदर भी एक ही हैं।

मेरे दफ़्तर की यह लड़की भी प्‍यार को पसंद करती है। और काग़ज़ात की अराजकता जो दिनों को महज़ मैला करती है, उनके बीच सफ़ेद सपनों वाले कुछ ऐसे भी काग़ज़ हैं, जिनकी वह रखवाली करती है, करुणा की कतरनें भी हैं, जिनसे वह अकेलेपन को चुनौती देती है। किसी दिन मैं, हमारे जीवन की इस बेतहाशा ग़रीबी के गीत गाना चाहता हूँ, बेहद साधारण चीज़ों की स्‍मृति का गीत, उस आरामदेह यात्रा का गीत जो हम आने वाले कल की दिशा में की थी, बिना बीते हुए कल को पर्याप्‍त प्रेम किए।

प्रेमी

प्रेमी ख़ामोश हो गए हैं।
प्रेम सबसे सुंदर, सबसे बारीक मौन है
जो सबसे ज़्यादा कांपता है
और जिसे सहना सबसे ज़्यादा मुश्किल।
प्रेमी कुछ खोज रहे हैं।
प्रेमी वे हैं जो त्‍याग करते हैं
जो बदल जाते हैं, जो भूल जाते हैं।
उनका दिल उन्‍हें बताता है कि वे कभी नहीं खोज पाएँगे।
वे खोज नहीं रहे, फिर भी उन्‍हें तलाश है।

दीवानों की तरह गलियों में भटकते हैं प्रेमी
क्‍योंकि वे अकेले हैं, अकेले।
हर एक पल के प्रति ख़ुद को समर्पित करते,
रोते हैं क्‍योंकि वे अपना प्‍यार बचा नहीं पाते।
वे प्रेम की चिंता करते हैं।
वे बस आज में जीते हैं, यही अच्‍छा करते हैं।
बस इतना ही आता है उन्‍हें।
वे कहीं जा रहे होते हैं,
हमेशा कहीं न कहीं जा रहे होते हैं।
वे उम्‍मीद करते हैं,
किसी एक ख़ास चीज़ की नहीं,
बस, ऐसे ही उम्‍मीद करते हैं।
उन्‍हें पता है कि जो कुछ भी वे खोज रहे, उसे नहीं पा सकेंगे।
प्रेम एक अनवरत स्‍थगन है।
अगली बार, अगली बार। ना, बस अगली सीढ़ी पर मिल जाएगा प्रेम।
प्रेमियों की प्‍यास कभी बुझाई नहीं जा सकती।
इस पर भी सौभाग्‍य की बात कि उन्‍हें हमेशा अकेले रहना पड़ता है।

प्रेमी किसी कहानी में आए सांपों की तरह हैं।
उनके हाथों की जगह सांप उगे होते हैं।
उनकी गरदन में जो नस होती है,
वह भी सांप की तरह ही फूलती है
और एक दिन उनकी गला घोंट देती है
प्रेमी सो नहीं पाते।
क्‍योंकि अगर वे सोये, तो कीड़े उन्‍हें खा जाएँगे।

वे अंधेरे में आंखें खोलते हैं
और उनमें आतंक बस जाता है।

पागल होते हैं प्रेमी, सिर्फ़ पागल
उन्‍हें ईश्‍वर ने छोड़ दिया है और शैतान ने भी।

कांपते हुए अपनी गुफ़ाओं से
बाहर निकलते हैं प्रेमी, भूख से हारे हुए
और पुराने भूतों का शिकार करते हैं।
वे उन लोगों पर हंसते हैं
जिन्‍हें सबकुछ पता होता है।
और उन पर भी हंसते हैं जो ताउम्र सच्‍चा प्‍यार करते हैं।  
और उन पर भी, जो मानते हैं कि
प्रेम एक ऐसा दिया है, जिसकी लौ कभी बुझाई नहीं जा सकती।

प्रेमी पानी भरने का खेल खेलते हैं
धुएँ से छल्‍ले बनाने का खेल।
एक ही जगह रुके रहने का खेल।
कहीं नहीं जाने का खेल।
वे खेलते हैं प्‍यार का लंबा और दुख-भरा खेल।
वे कभी हार नहीं मानते।
किसी भी क़िस्‍म की सुलह उन्‍हें शर्मिंदा कर देती है।

एक पसली से दूसरी पसली तक ख़ाली होते हैं वे
एक ख़ाली मौत उबलती रहती है उनकी आंखों के पीछे
वे भटकते हुए रोते हैं जब तक कि सुबह न हो जाए।
ट्रेनें उन्‍हें अलविदा कह देती हैं
मुर्ग़े दुख से भरकर जागते हैं।

कभी-कभी एक नवजात भूमि की ख़ुशबू उन तक पहुंचती है
एक औरत की ख़ुशबू जो अपनी जांघों के बीच हाथ दबाए सोई है शांति से
शांत पानियों की ख़ुशबू, और रसोई की भी।

और तब प्रेमी अपने होंठों के बीच
वह गीत गाना शुरू करते हैं
जो उन्‍होंने कभी सीखा ही नहीं था।
और उसके बाद रोते जाते हैं, रोते ही जाते हैं
इस ख़ूबसूरत ज़िंदगी के लिए।

*

सारे अनुवाद और टिप्पणी : गीत चतुर्वेदी