पिंक स्लिप डैडी

2009 में जब ‘पिंक स्लिप डैडी’ का पहला प्रकाशन हुआ था, तब ‘कथादेश’ पत्रिका ने उसे हाल के वर्षों की सर्वश्रेष्ठ कथाकृति कहा था। यह हिन्दी की उन विरल कथाकृतियों में है, जो कार्पोरेट जगत के तिलिस्म, छल, अपमान, गलाकाट प्रतिस्पर्धा और हास्यास्पद बौद्धिकता के पहलुओं का गंभीर और मनोरंजक चित्रण करती है।

इसी किताब में शामिल है गीत चतुर्वेदी का बहुचर्चित नॉवेला ‘सिमसिम’, जिसके अनिता गोपालन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी अनुवाद को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठत ‘पेन-हैम ट्रांसलेशन ग्रांट अवार्ड’ हुआ। हिंदी कथा-साहित्य में ग्राउंडब्रेकिंग योगदान के लिए ‘सिमसिम’ की सराहना, न केवल हिन्दी साहित्य में, बल्कि भाषाओं के पार भी हुई है। 

क्रेडिट कार्ड और बैंक-लोन की शिकारी-दुनिया पर आधारित ‘गोमूत्र’ इस बात का उदाहरण है कि गीत चतुर्वेदी अपने कथा-साहित्य में साधारण भारतीय मध्यवर्गीय मानसिकता को कितनी सूक्ष्मता से पकड़ते हैं। तनी और सधी हुई भाषा, अचूक निरीक्षण-शक्ति और उपजाऊ कल्पनाशीलता का प्रयोग करते हुए ‘गोमूत्र’ में गीत चतुर्वेदी, नब्बे के दशक के बाद की भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था का अर्थपूर्ण क्रिटीक रचते हैं।

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