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‘आलाप में गिरह’ और ‘न्यूनतम मैं’ जैसे चर्चित कविता-संग्रहों के बाद गीत चतुर्वेदी की नई किताब है ‘ख़ुशियों के गुप्तचर’

गीत चतुर्वेदी के गद्य में उनकी कविता की ख़ुशबू है। ‘अधूरी चीज़ों का देवता’ उनके जादुई गद्य का ताज़ा उदाहरण है।

गीत चतुर्वेदी की पहली कहानी ‘सावंत आंटी की लड़कियाँ’ जब 2006 में पहल पत्रिका में छपी थी, तो उसने हिन्दी साहित्य में तहलका मचा दिया।

2009 में जब ‘पिंक स्लिप डैडी’ का पहला प्रकाशन हुआ था, तब कथादेश पत्रिका ने उसे हाल के वर्षों की सर्वश्रेष्ठ कथाकृति कहा था।

2017 में प्रकाशित गीत चतुर्वेदी का दूसरा कविता संग्रह, जिसमें 2010 से 2014 तक की 63 कविताएँ शामिल हैं।

यूँ तो गीत चतुर्वेदी की पहली कविता 1994 में छप गई थी, जब उनकी उम्र 17 वर्ष थी, लेकिन कविताओं की पहली किताब बनाने में उन्होंनें अगले 16 साल और लगा दिए।

साहित्य, सिनेमा, कला, संगीत, जीवन, फ़िलॉसफ़ी, प्रेम-कथाएँ आदि विषय ऐसे हैं, जिन पर गीत चतुर्वेदी ने वर्षों तक अध्ययन और लेखन किया।

In THE MEMORY OF NOW, every poem is stylistically different, differently new, a memory made…

‘आलाप में गिरह’ और ‘न्यूनतम मैं’ जैसे चर्चित कविता-संग्रहों के बाद गीत चतुर्वेदी की नई किताब है ‘ख़ुशियों के गुप्तचर’

गीत चतुर्वेदी के गद्य में उनकी कविता की ख़ुशबू है। ‘अधूरी चीज़ों का देवता’ उनके जादुई गद्य का ताज़ा उदाहरण है।

गीत चतुर्वेदी की पहली कहानी ‘सावंत आंटी की लड़कियाँ’ जब 2006 में पहल पत्रिका में छपी थी, तो उसने हिन्दी साहित्य में तहलका मचा दिया।

2009 में जब ‘पिंक स्लिप डैडी’ का पहला प्रकाशन हुआ था, तब कथादेश पत्रिका ने उसे हाल के वर्षों की सर्वश्रेष्ठ कथाकृति कहा था।

2017 में प्रकाशित गीत चतुर्वेदी का दूसरा कविता संग्रह, जिसमें 2010 से 2014 तक की 63 कविताएँ शामिल हैं।

यूँ तो गीत चतुर्वेदी की पहली कविता 1994 में छप गई थी, जब उनकी उम्र 17 वर्ष थी, लेकिन कविताओं की पहली किताब बनाने में उन्होंनें अगले 16 साल और लगा दिए।

साहित्य, सिनेमा, कला, संगीत, जीवन, फ़िलॉसफ़ी, प्रेम-कथाएँ आदि विषय ऐसे हैं, जिन पर गीत चतुर्वेदी ने वर्षों तक अध्ययन और लेखन किया।

In MEMORY OF NOW, every poem is stylistically different, differently new, a memory made with past, made with now…

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