World Literature

Recent Posts

GC Blog thumbnail World Lit- Pamuk2

ओरहान पामुक – 2 : मैं स्कूल नहीं जा रही

मैं स्‍कूल नहीं जा रही, क्‍योंकि मुझे नींद आ रही, मुझे सर्दी है और स्‍कूल में कोई मुझे पसंद नहीं करता। मैं स्‍कूल नहीं जाऊँगी क्‍योंकि वहाँ दो बच्‍चे मुझसे बड़े हैं, ताकतवर भी हैं, वे हाथ अड़ाकर मेरा रास्‍ता रोक देते हैं। मुझे उनसे डर लगता है। मुझे डर

Read More »
GC Blog thumbnail World Lit- Pamuk1

ओरहान पामुक – 1 : जिस दिन पिता नहीं रहे…

उस रात मैं देर से घर पहुँचा था। पता चला, पिताजी की मृत्यु हो गई है। क़रीब दो बजे रात मैं उनके कमरे में गया, ताकि उन्हें आख़िरी बार देख सकूँ। सुबह से फोन आ रहे थे, लोग आ रहे थे, मैं अंत्येष्टि की तैयारियों में लगा हुआ था। लोगों

Read More »
laszlo-krasznahorkai

लास्‍लो क्रस्‍नाहोरकाई : मैं बीस पेज लम्बे वाक्य क्यों लिखता हूँ?

आज मुझे अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मान और स्‍वीकृति मिल रही है, इसका कारण सिर्फ़ मेरा लेखन नहीं है, बल्कि असली श्रेय तो उन अनुवादकों को है, जिन्‍होंने अंग्रेज़ी और दूसरी भाषाओं में मेरा साहित्‍य पहुँचाया है। मेरा ऐसा मानना है कि मैंने अपनी भाषा में अपनी किताब लिख दी, मेरा काम वहीं

Read More »
guntar-grass

गुंटर ग्रास : जब मैं हिटलर के साथ था

मेरा बचपन एक झटके से ख़त्‍म हुआ था। तब मैं बारह साल का था। जिस शहर में मैं रहता था, उसके कई हिस्‍सों में युद्ध शुरू हो गया था। यह द्वितीय विश्‍वयुद्ध की शुरुआत थी। रेडियो पर युद्ध के समाचार आते थे और तल मंज़िल पर बने अपने फ्लैट में

Read More »
ben-okri

बेन ओकरी : कविता के बारे में कुछ ज़रूरी बातें

ईश्वर जानता है कि किसी भी समय के मुकाबले हमें कविता की ज़रूरत आज कहीं ज़्यादा है। हमें कविता से प्राप्त होने वाले दुष्कर सत्य की ज़रूरत है। हमें उस अप्रत्यक्ष आग्रह की ज़रूरत है, जो ‘सुने जाने के जादू’ के प्रति कविता करती है। उस दुनिया में, जहाँ बंदूकों

Read More »
pablo-neruda

पाब्लो नेरूदा – 2 : मेरी पहली कविता

दुनिया मुझे पाब्‍लो नेरूदा के नाम से जानती है, लेकिन घरवालों ने स्‍पैनिश परंपरा के अनुकूल मेरा लंबा-सा नाम रखा था- नेफ्ताली रिकार्दो रेयेस बासोआल्‍तो। जब मैंने कविताएं लिखनी शुरू कीं, तो मैंने अपना नाम पाब्‍लो नेरूदा रख लिया।

Read More »
pablo-neruda

पाब्‍लो नेरूदा – 1 : मेरा जीवन, मेरे संघर्ष

दुनिया मुझे पाब्‍लो नेरूदा के नाम से जानती है, लेकिन घरवालों ने स्‍पैनिश परंपरा के अनुकूल मेरा लंबा-सा नाम रखा था- नेफ्ताली रिकार्दो रेयेस बासोआल्‍तो। जब मैंने कविताएं लिखनी शुरू कीं, तो मैंने अपना नाम पाब्‍लो नेरूदा रख लिया।

Read More »

Popular Categories

en_USEnglish